शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

हिजाब में हैं अल्फाज़ कई,
सलूक-ए-ज़ुबां से हिचकाए हुए...
बिन स्याही के उकेरी गई,
लकीरों के हजूम से छिपाए हुए..

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