रविवार, 31 जुलाई 2011

इस हजुमेहैरां में हम जो सबसे आगे है...

इस हजुमेहैरां  में हम जो सबसे आगे है,
चाँद के मुसाफिर हैं मगर चांदनी से भागे हैं...

मेरे पापा द्वारा लिखी गई चंद पंक्तियाँ...







शनिवार, 30 जुलाई 2011

लम्हों की रफ़्तार मैं रिश्तों को तरजीह देना...

 लम्हों की रफ़्तार मैं रिश्तों को तरजीह देना,
कितना मुश्किल है अपनी चाहत को फजीह देना..

चाहे हम कितनी भी सफाइयां दे दें अपने हक में.
कितना मुश्किल है अपने साए को वजीह देना...


मंगलवार, 26 जुलाई 2011

ख़त्म होने की फ़िराक में थी मेरी कलम की स्याही,

ख़त्म होने की फ़िराक में थी मेरी कलम की स्याही,
जाने क्या है कि सिक्का रुकने का नाम ही नहीं लेता...

रविवार, 24 जुलाई 2011

दस्तूर...

केदिअत में पड़े कुछ जुमले उफान बनकर भीतर ही भीतर कोह्र्राम मचा देते हैं,
लफ्ज़ गर फिसल जाएँ बदहवास से तो साख को सीख पे लटका देते हैं,
माने या न माने तू ऐ ज़िन्दगी, पर दुनिया का दस्तूर ही कुछ ऐसा है,
यहाँ लोग बेखोफ, सरेआम फितरतों के लिबास बदल देते हैं...


के अपनी मिसाल छोड़ जाएँ यहाँ...

अपनी धुन मैं चले जा रहे हैं,
हवा के  परों  पे आशियाना  है,
दूर है मंजिल; है कठिन रास्ता,
पर हमें तो चलते जाना है...

हर ज़र्रा सवाल करता है हमसे,
आये हो कहाँ से और जाना है कहाँ,
अपनी तो बस तम्मना है यही,
के अपनी मिसाल छोड़ जाएँ यहाँ...

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

हां मैंने उनको देखा है …

चेहरे पर ज्ञान का तेज और आव- भाव में  सादगी... प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के कुछ ऐसे ही गुणों से मेरा सामना हुआ... बतौर विज्ञान पत्रकार मेरी मुलाकात कुछ वरिष्ट वैज्ञानिकों से हुई जिन्होने मेरे नज़रिेए पर गहरी चाप छोड़ी ...
प्रोफेसर  सी एन आर राव से मिलने का सुअवसर मिला.... मुझे बताया गया था कि  शायद वो बात करने को राज़ी न हों, अगर बात करने को तैयार भी हो जाये तो ज़रा संभल के बात करना...  पता नहीं कहा से सुन सुनाकर ऐसा कहा गया था,  क्योंकि प्रो. राव ऐसे व्यक्ति हैं जिनके बात करके किसी भी उम्र का व्यक्ति आत्मविश्वास से भर जाये... उन्होंने मुझे nanotechnology पर कि गयी रिसर्च के बारे में बताया और बैंगलुरु में अपने स्कूल के बारें में भी बताया। उनके चेहरे से साफ़ झलक रहा था कि वो संस्थान उनके दिल के बहुत करीब है … उन्होंने बड़े ही उत्साह कई साथ मुझे वहाँ आने का न्यौता भी दिया ... 
पहली बार किसी महान वैज्ञानिक से आमने सामने बात करना सच में एक अविस्मरणीय  और  अद्भुत
अनुभव था.

ऑफिस मैं एक दोपहर मुझे सन्देश मिला कि  डॉ अनिल काकोडकर दिल्ली आये हुए हैं, शाम को उनसे साक्षात्कार का कार्यक्रम है. भेंटवार्ता अहम् थी इसलिए हमारे कार्यक्रम निर्माता भी साथ चले...  डॉ काकोडकर का व्यक्तित्व भी सरल और ज्ञानोजित है. उन्होंने बहुत विनम्रता के साथ हमारा स्वागत किया और बड़े ही धैर्य से सारे सवालों के जवाब दिए. रेडियो धर्मिता और आणविक विज्ञान पर उनकी समझ वाक़ई में ज़बरदस्त है...
11 मई, 2011 मेरे जीवन के सबसे यादगार और बेहतरीन दिनों में से एक. technology day के अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग, जिसमें डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम मुख्यातिथि थे. डॉ कलाम मंच से उतरकर अपनी गाड़ी की और चल दिए. जब मेने उनके बात करने का अनुग्रह किया तो वे गाड़ी से बाहर आये और मुजसे बात की. उनके शब्द '"india needs you, discover the real you within yourself"  मेरे जीवन का मूल मंत्र बन गये. उस दिन मेरा जन्मदिन भी था और शायद इससे बड़ा तोहफा और क्या हो सकता था, बचपन से जिस इन्सान से मिलना चाहते थी उससे भेंट हो गयी ... वो किसी सपने के सच होने जैसा था.

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर मैं 16 से 18 जून तक चले वैज्ञानिक प्रवृति पर राष्ट्रीय कार्यशाला  की रिपोर्टिंग का अवसर मिला. कार्यशाला में देश भर  से  अनेक वैज्ञानिकों ने भाग लिया. वहाँ मुझे देश के वरिष्ट वैज्ञानिकों से साक्षात्कार का सुअवसर मिला. समय की कमी होने पर भी उन्होंने किसी भी इच्छुक को निराश नहीं किया. इसी दौरान  मुझे जीवन के कुछ यादगार लम्हे जुटाने का अवसर मिला.  
प्रो ओबैद सिद्दीकी, प्रसिद्ध आणविक जीवविज्ञानी. जितने उच्च विचार उतना ही सरल व्यक्तित्व.
प्रो पी एम भार्गव, देश के विख्यात और महाज्ञानी वैज्ञानिकों में इनका शुमार है. स्वाभाव इतना सरल और विनम्र.
डॉ एम अन्नादुरै, चंद्रयान 1 और 2 के प्रोजेक्ट निदेशक और इसरो के कई अभ्यानों मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. बच्चों से बात करते हुए वो बच्चे  से लगते हैं और युवाओं के बात करते हुए युवा. कठिन लगने वाले विषयों को सरलता से समझा देने की अजब कला है उनमें .…