बुधवार, 14 अगस्त 2013

आपके हर सवाल पर लाजवाब हूँ मैं,
किसी को कुछ भी कहना हो तो शौक से कहें ?

कौन सी राह है जाने

कौन सी राह है जाने,
जाने कौन सी है डगर.…  
साँझ ढलेगी जाने कब,
जाने कब होगी सहर …
 

अपनी सुनूँ या आप की,
उलझन का सरोकार है... 
क्या करुँ उस मनमर्जी का,
जिससे सबको इनकार है… 

बुधवार, 9 मई 2012

घूंट पी लिया जाए....

मुंह से निकले अल्फाज़,
उम्रों का फंदा बन सकते है...
तो मुनासिब यही है के आलम,
घूंट पी लिया जाए....

मंगलवार, 8 मई 2012

अब ये बचपना दुखता है...

जाने कब हम चलना सीखेंगे,
फितरतों को पढ़ना सीखेंगे...
इतनी ठोकरे लगी घुटनों पे,
के अब ये बचपना दुखता है...

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

ख्वाब सहम जाएं जब हक़ीकत के दर्मयाने से,
तो ज़ज्बा ही है जो उम्मीदों को सहला देता है...
उस लम्हें की फितरत; बस में न थी सोच-ए-कामिल,
दिल खोला तो हर नब्ज़ अपनी हो गई...