आँख का मोती झलक गया,
अखियों का तारा वो, जीवन का सहारा वो,
वो हीरा अनमोल; गुम है पत्थरों में यही कहीं...
चुरा ली किसी ने मेरे दीपक की लो,
या फिर मेरी ही नादानी से अँधेरा छा गया...
जलती भुजती आस लिए हर घड़ी करूँ तेरा इंतज़ार,
सुध ना रही किसी बात की; देख ले आके मेरा हाल..
राहों पे टिकी आँखें पत्थर हो गई; तेरी आमत की आस में,
चोखट पे बेठी रहूँ; जाने किस पल तू आ जाए...
कितना सुन्दर होगा वो लम्हा जब तुझे निहारूंगी,
हाथ तेरे गालों पे फेर के; जी भर रोउंगी...
सीने से लगाके, तुजसे लूंगी हर पल का हिसाब,
बलाएँ लेके तेरी तुझे आँचल में छुपा लूंगी..


