ufaan...
vicharon ka veg...
शनिवार, 14 अप्रैल 2012
उन्मुक्त हवा मन को सहलाती है,
सहर की आहट, हर उम्मीद को बहलाती है...
शिकन ने माथे पर कुछ यूँ कलाकारी की है,
के हर आती जाती निगाह कोहराम मचाती है...
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