ufaan...
vicharon ka veg...
शुक्रवार, 4 नवंबर 2011
कुछ तो रखो सस्ता यहाँ...
आदि इतने हुए कैदखानों के, के अब हवाखानों कि परवाह कहाँ,
आँख न भाती वो सरहदें, बेमोल मिलती है सलाह जहाँ...
मसरूफियत इतनी भी क्या के वक्त भी तंगी पे आ जाए ,
महंगाई के इस सरोकार में , कुछ तो रखो सस्ता यहाँ...
1 टिप्पणी:
jot
9 नवंबर 2011 को 9:25 am बजे
nice lines
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