सब जग मेरा अपना यही माँ ने सिखलाया...
रचा है माँ ने मुझे अपने काज निभाने को,
निज धरा का कौना कौना सजाने को...
बड़े लाड जतन से पाला पौसा,
धैर्य से मुजमें जगाया भरोसा...
झुकी नज़रों से करती हूं कबूल,
तेरा आँचल छोड़ की मैंने बड़ी भूल...
माँ मुझे अपनी गोद में बुला दे,
तुजसी बनने का हौंसला दे...

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