केदिअत में पड़े कुछ जुमले उफान बनकर भीतर ही भीतर कोह्र्राम मचा देते हैं,
लफ्ज़ गर फिसल जाएँ बदहवास से तो साख को सीख पे लटका देते हैं,
माने या न माने तू ऐ ज़िन्दगी, पर दुनिया का दस्तूर ही कुछ ऐसा है,
यहाँ लोग बेखोफ, सरेआम फितरतों के लिबास बदल देते हैं...
beautiful.....keep it up dear!! ;-)
जवाब देंहटाएंthanks... is this vishavjot?
जवाब देंहटाएंyaaar I am gonaa fan of u now
जवाब देंहटाएंare swati... tum b na...
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