ufaan...
vicharon ka veg...
बुधवार, 22 फ़रवरी 2012
तवज्जो को खुदी से महरूम किया,,,
तवज्जो को खुदी से महरूम किया,
तो नज़रंदाज़ी का गिला न कर...
जो उगा दें ज़मीं पर फितूरी,
ऐसी हवा से मिला न कर...
ताउम्र तुमने जो टीले बनाए,
उन्हें कोई मिटटी के ढेर कहे जो...
अनजानी सोचों पर भरोसा है इतना,
तो अपनी हाज़िरी का भी ये सिला न कर...
1 टिप्पणी:
Pooja Prasad
23 फ़रवरी 2012 को 7:05 am बजे
ओह गुड अरपना, क्या ये तुमारी ही लिखी है? सुंदर
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ओह गुड अरपना, क्या ये तुमारी ही लिखी है? सुंदर
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